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Thursday, 17 April 2014

ग़ज़ल-5 - हसरत

हसरत

राह में खड़ी दीवारें गिर जाएं,
दिल से दिल फिर मिल जाएं..

डाली  है  मतभेदों  ने जो दरारे,
 प्यार के मरहम से वो मिट जाएं..

तमाम  उम्र  जिसकी ख्वाहिश रही,
 खुदा करें! एक नजर वो दिख जाए..

बद्दुआओं के सहारे कटी है जिन्दगी,
 आखिरी दौर में एक दुआ मिल जाए..

कि वो आएं, उनका दामन उलझे,
और  मेरी  हसरत पूरी हो जाए..
                                        
                                                 ****************** 
    निदा-ए-तन्वीर 
   ******************
    (c)... तरुण कु. सोनी तन्वीर
    ईमेल- tarunksoni.tanveer@gmail.com
           वेब ब्लॉग - http://nanhiudaan.blogspot.com

4 comments:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट अभिव्यक्ति की चर्चा कल रविवार (25-05-2014) को ''ग़ज़ल को समझ ले वो, फिर इसमें ही ढलता है'' ''चर्चा मंच 1623'' पर भी होगी
    --
    आप ज़रूर इस ब्लॉग पे नज़र डालें
    सादर

    ReplyDelete
  2. हार्द्धिक आभार अभिषेक जी
    जरुर देखूंगा में ब्लॉग.

    ReplyDelete

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