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Saturday, 26 July 2014

क़िताबें

क़िताबें

यूँ ही ना समझो
इन किताबों को
इनमे है जीवन सार.

हर अक्षर अक्षर  में है ब्रह्मा.
हर शब्द  - शब्द  में है विष्णु .
शब्दों के हर गूढ़ रहस्यों में
है अस्तित्व शिव का..

शिव ही सत्य है.
शिव ही सुन्दर है
शिव ही आत्मानन्द  है

यही रहस्य जीवन का
छुपा है इन किताबों में.

आदि से अनादी तक
भूत से वर्तमान तक
वर्तमान से भविष्य तक
इनका ही वर्चस्व है
इनमे ही ज्ञान सर्वस्व है....

आदम से आदमी तक
और आदमी से परमानन्द  तक
गीता- कुरआन- बाइबल
वेद- उपनिषद और ये साहिबे ग्रन्थ तक
ईश्वर के उपदेशों
दया धर्म मार्ग की संवाहक है
ये क़िताबें ..

बचपन में
माँ सा वात्सल्य  देती
यौवन में प्रेयसी सा प्यार
और बुढ़ापे  में
साथी सा सहारा देती है
ये क़िताबे ....

हर घनघोर  अँधेरी राह में
प्रकाश दिखाती है
ऊँगली थामें जीवन की
हमारा साथ निभाती है
ज्ञान  भरी
ये क़िताबें...

********************************

                                              Tarun k. soni Tanveer 

3 comments:

  1. बहुत सुन्दर भावों को समेटे हृदय स्पर्शी रचना है.. बधाई

    ReplyDelete
  2. किताबों पर आपने ये बहुत ही सुंदर रचना लिखी है तरुण जी!!! आपको इस कविता के लिए ढेरों बधाई!!!

    ReplyDelete
  3. सुन्दर , सार्थक कविता |

    किताबें इतना कुछ देकर भी हमसे छूटी जा रही हैं ....

    ReplyDelete

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