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आपका अपना - तन्वीर

ज्योतिष विज्ञान


                                                                  
                              
               
                           1.  शनि उपासना

   शनि गंभीर एवं क्रुर प्रकृति के ग्रह है। ये दीर्घाकार, तमोगुणी तथा पाप ग्रह है। कुटनीति, छल, कपट, क्रोध, मोह, पलायन, राजदण्ड, सन्यास आदि शनि के स्वभाव में है।
         इसी वजह से आमजन में यह धारणा हैं कि “शनि सदैव अनिष्टकारी ही होते है।“ जो कि पूर्ण सत्य नहीं है। शनि सदैव अनिष्टकारी नहीं होते है। ये तो मनुष्यों के पूर्व संचित कर्मो के अनुसार अच्छा या बुरा फल देते है। शुभ कर्म वालों को सुख, समृद्धि और उन्नति देते है तो अशुभ कर्म वालों को दुःख, दरिद्रता, और पतन देते है।
         “शनि राजा को रंक और रंक को राजा बनाने का सामर्थ्य रखते है। इसी वजह से इन्हे भाग्य विधाता भी कहा जा सकता है।“
     अतः शनि को प्रसन्न कर शुभ फल प्राप्त करने एवं अशुभ फलों से बचने हेतु निम्न उपाय किये जा सकते है।
मंत्र जापः- शनि के मंत्रों के विधिवत जप करने से शनि जनित बाधाओं का निवारण होता है। एवं शनि शुभ फल प्रदान करते है। शनि की ढैया एवं साढ़े साती में मंत्र जप प्रभावशाली एवं शीघ्र फलदाय होते है। मंत्र जप स्वयं या किसी योग्य पंडित से विधिवत कराने चाहिए।
शनि को प्रसन्न के मंत्र एवं जप संस्थाः-
1. वैदिक मंत्रः-   नीलाजंन समाभासं रविपुत्रम् यमाग्रजम्।
                छाया मार्तण्ड सम्भूतम् तम् नमामि शनै श्चरम्।।
                                           (जप संख्या 92 हजार) 
       2.       ऊँ शन्नो देवी रभिष्टयऽआपो भवन्तु।                              
                  प्रतिये शंय्योरभि स्त्रवन्तुनः।।    (जप संख्या 23 हजार)
       3.      ऊँ स्वः भुवः।
              ऊँ सः खौं खीं खां ऊँ शनिश्चराय नमः।। (जप संख्या 23 हजार)               
       4.     ऊँ ऐं ह्नीं स्त्रीं शनैश्चराय नमः।।  (जप संख्या 23 हजार) 
       5.     ऊँ शं शनये नमः।।       (जप संख्या 23 हजार)
                        तंत्रिक मंत्र
       6.     ऊँ खां खीं खूं सः।।       (19 हजार)
     7.    ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।  (23 हजार जप)
                   शनि गायत्री मंत्र
     8.      ऊँ भगभवाय विद्मेह मृत्युरूपाय धीमहि तन्नो
              शौरिः प्रचोदयात्।।    (23 हजार जप)
                     पौराणिक मंत्र  
     9.      ऊँ शं शनैश्चराय नमः।।   (23 हजार जप)

स्त्रोत पाठ द्वाराः- शनि देव का समस्त कष्ट निवारण हेतु “ऋषि पिलाप्द“ द्वारा रचित स्त्रोत का नित्य प्रातः उठते ही बिस्तर में बैठे-बैठे करना चाहिए।
स्त्रोतः-           कोणस्थः पिंगलो बभ्रुः कृष्णो रौद्रोऽन्तको यमः।
                    सौरिः शनैश्चरौ मन्दः पिप्लादेन संस्तुतः।।
                     एतानि दस नामामि पातरूत्थाय यः पठेत।
                     शनैश्चर कृता पीड़ा न कदाचिद् भविष्यति।।
अर्थातः- कोणस्थ, पिगंल, बभ्र, कृष्ण, रौद्र, अन्तक, यम, सौरि, शनैश्चर, मंद - इस प्रकार ऋषि पिप्लाद ने स्तुति की ।इन दस नामों को प्रातः काल उठकर जो पढता है, उसको शनिग्रह का कष्ट कभी नहीं होता है।
       राजा दशरथ कृत शनि स्तुति का पाठ करने से भी शनि प्रसन्न होते है।
    
।। राजा दशरथ कृत शनि स्तुति।।

सूर्यपुत्र! नमस्तेतु सर्वभक्षाय वै नमः।
देवासुरमनुष्याश्च पशुपक्षि सरीसृपाः।।
त्वया विलोकिताः सर्वे देन्यमाशु ब्रजन्ति ते।
ब्रह्म शका्रे हरिश्चैव ऋषयः सप्ततारकाः।।
राज्य भ्रष्टाः पतन्त्येते त्वया दृष्टयाऽवलोकिताः।
देशाश्च नगरग्रामा दिपाश्चैव तथा दुमाः।।
त्वया विलोकिताः सर्वे विनश्यन्ति समूलतः।
प्रसादं कुरू हे सौरे! वरदो भव भास्करे।।

भावार्थः- हे सूर्य पुत्र शनिदेव! आपको नमस्कार है। आप सभी का विनाश करने वाले चमकते ग्रह है। देवता, असुर, मनुष्य, पशु-पक्षी, सर्प आदि प्राणी आपकी दृष्टि मात्र से दुखी हो जाते है। ब्रह्म, इन्द्र, विष्णु और सप्तऋषि पर भी जब आपकी दृष्टि जाती है तो ये सभी अपनों पदों से विमुख हो जाते है। देश, नगर, गांव, द्वीप तथा वृक्ष आदि भी आपकी दृष्टि पड़ने पर समूल नष्ट हो जाते है। अतः हे सूर्यपुत्र शनिदेव! हमारे ऊपर प्रसन्न होकर, हमें शुभ वर दें।
     उपरोक्त मंत्रों में से कोई भी मंत्र का घर, बगीचे के किसी एकान्त कोने में था शनि मंदिर में काले आसन पर लाल अथवा काले रंग के बिना सीले वस्त्र धारण कर पूर्व श्रृदा एंव विश्वास से मंत्र जप करें। अनुष्ठान के लिए किसी भी शनिवार से शुरू कर नियमित रूप से 21 दिनो दिनों में 23 हजार जप विधि द्वारा करना श्रैष्ठ है। इन मंत्रों, स्त्रोतो एंव स्तुति का पाठ करने से शनिदेव शीघ्र प्रसन्न होकर मनोवांछित फल देते है।
                                       ।। जय शनिदेव की।।
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2.    शनिदेव को प्रसन्न करने के अचुक उपाय

         शनि की अनुकुलता प्राप्त करने के लिए शनि संबंधी वस्तुओं का दान, रत्न धारण एवं इनके मंत्रों का जाप करना चाहिए। जिससे की शनि के अशुभ प्रभावों में कमी आती है। एवं शुभ प्रभावों में बढ़ोतरी होती है।
1. शनिदेव की प्रतिमा पर हर शनिवार के दिन काले तिल का तेल या सरसो के तेल से अभिषेक करें एवं दीपक जलावें।
2. शनिवार को जातक सिर में तेल व साबुन का प्रयोग ना करें।
3. चमड़े के जुते, बेल्ट, चप्पल बेग अथवा पर्स का प्रयोग ना करें।
4. मांस-मदिरा का सेवन ना करें।
5. शनिवार का व्रत रखें एवं एक समय बिना नमक का भोजन करें। काले उड़द की दाल एवं चावल की बनी खिचड़ी का ही सेवन करें।
6. शनिवार को शनिदेव को काले उड़द एवं कई की बनी माला अर्पित करें।
7. झूठ, छल, कपट, चोरी एवं क्रोध से दूर रहें।
8. सूर्योदय से पूर्व नित्य लोहे या ताबें के लोटे में काले तिल, नीला पुष्प व कोयले का टुकडा डालकर पीपल वृक्ष के मूल में अर्ध्य दें एवं सरसों के तेल का दीपक जलावेें।
9. आठ किलो काले उड़द में सरसों का तेल मिलाकर शनिवार के दिन बहती नदीं में प्रवाहित करें।
10. मकान की छत पर लोहे या लकड़ी का कबाड़ ना रखें। चीटीयों को तिल व शक्कर खिलाये।                                                                     
11.शनिवार के दिन सुरमा जमीन में गाड़ने से भी शनि प्रसन्न होते है।
12. “बजरंग बाण“ या “हनुमान चालीसा“ का नित्य पाठ करें।
13. शनि की प्रिय वस्तुएं-काले तिल, काले उड़द, लोहा, तेल, कुलथी, काले पुष्प, काले वस्त्र, जूता-चम्पल, कस्तूरी आदि का दान करने से भी शनि शांत होते है।
14. शनिवार के दिन सवा हाथ काला कपड़ा, सवा तोला काले तिल, सवा तोला काला उड़द, एक लोहे की कील, कोयला, काला पुष्प (यदि उपलब्ध हो तो) एवं सामर्थ्यनुसार दक्षिणा, सभी वस्तुऐं उस सवा हाथ कपड़े में बांधकर पोटली बनर ले। एवं जिस जातक को शनि की दशा चल रही हो उसके सिर पर आठ बार घुमाकर शाम के समय शनि मंदिर में प्रतिमा के चरणों में रखें दे। सरसो का तेल प्रतिमा पर चढ़ावें। दीपक जलावें। एवं काले घोड़े की नाल से बनी मुद्रिका को प्रतिमा के चरणों में पड़े तेल में डुबोकर दीप-धूप दिखाकर शनिदेव के अनुकुलता की कामना करें। मनोवांछित फल प्राप्त होगा। (ये प्रयोग शनि से प्रभावित जातक स्वयं ही करें तो बेहतर होगा)
15. शनिवार के दिन बारह बादाम काले कपड़े में बांधकर घर की अंधेरी कोठरी में लोहे के पात्र में सदैव रखने से भी शनि शांत होते है।
16. शनिवार के दिन अपने हाथ की नाप का 9 हाथ काला धागा लेकर उसकी माला बनाकर धारण करने से भी बहुत लाभ मिलता है।
17. घर में काले गुलाब का पौधा लगाकर नित्य प्रातः उस पर शुद्ध जल अर्पित करने से भी शनि प्रसन्न होते है।
18. काले शिवलिंग पर नित्य दुग्ध मिश्रित जल अर्पित करने एवं महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से भी शनि के अशुभ परिणामें में कमी आती है।
19. शमी वृक्ष को जल चढ़ाने से भी शनिदेव प्रसन्न होते है।
20. किसी योग्य पण्डित से या स्वयं शनिदेव के मंत्रों का विधिवत अनुष्ठान करावें।
21. 50 ग्राम चांदी का चौकोर टुकड़ा सदैव घर में रखें।
22. हस्ताक्षर करने के लिए सदैव काली स्याही अथवा काले रंग की बॉडी का  पेन प्रयोग लेवें.                                   
                      रत्न एवं धातु से उपाय
1. उत्तम क्वालिटी का नीलम सवा पाँच रत्ती का धारण करने से भी शनि के शुभाफल प्राप्त होते है। रत्न निर्दोष होना चाहिए उसमें किसी भी प्रकार का दाग-धब्बा, चीरा नहीं होना चाहिए।
2. जो व्यक्ति नीलम खरीदने में असमर्थ हो वे नीलम का उपरत्न जामुनिया, नाली, कटैला और लाजवर्त में से कोई भी रत्न सवा पाँच रत्ती का लेकर धारण करना चाहिए।
3. काले घोड़े की खुरताल की अंगूठी बनवाकर धारण करना चाहिए।
4. नाव की कील की भी अंगूठी बनवाकर मध्यमा अंगुली में धारण की जा सकती है।
5. काले घोड़े की खुरताल अथवा नाव की कील की अंगुठी यदि शनिवार के दिन कृतिका नक्षत्र हो तो उस दिन बनावक पहनने से शनि शमन के साथ-साथ दीठ-मुठ आदि तांत्रिक क्रियाओं से भी रक्षा होती है।
                    रूद्राक्ष एवं जड़ी बुटीयों से उपाय
1. सातमुखी रूद्राक्ष धारण करने से शनि के कुप्रभावों में कमी आती है।
2. शनिवार को जब-जब पुष्प नक्षत्र हो तब बिधुवा बुटी की जड़ एवं शमी (छोकरी) की जड़ को काले धागे में बांधकर दाहिनी भुजा में धारण करना चाहिए।
3. काले गुलाब के पौधे की जड़ को पुष्प नक्षत्र में धारण करने से भी लाभ प्राप्त होता है।  
                   यंत्र धारण द्वारा उपाय
शनि की अनिष्टका के लिए शनि यंत्र को रविपुष्प योग में अथवा किसी भी शनिवार को अनार की कलम, काजल की स्याही या केसर की स्याही से भोजपत्र या सफेद कागज पर निर्माण करें। फिर उसका विधिवत पूजन करके प्रतिष्ठा करा लें या स्वयं कर ले।
मंत्रः- ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।  (जप संख्या 23 हजार)
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