हार्द्धिक स्वागत

मेरे निजी ब्लॉग "मेरी नन्ही उड़ान " पर आप सबका हार्द्धिक स्वागत है.

आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की अभिलाषा है. ..हार्द्धिक आभार सहित...

आपका अपना - तन्वीर

ग़ज़लें


1. सलाह
जब तलक ना आए वक्त, जुबाँ अपनी खामोश रखिए,
कोई कहता हो गर कुछ, हर बात को गौर से सुनिये।

बिन माँगे, बिन पूछे सलाह देते हैं, आज जहाँ वाले,
कुछ करने से पहले, जरा खुद से भी सलाह कीजिये।

दुःख भी है, संघर्ष भी है, गुरबत में मेरी तन्हाई भी है,
सोच के दर्द में ऐसा, जीवन से यूँ किनारा ना कीजिये।

हर एक चीज का, एक वक्त होता है जिन्दगी में,
जिसने हमें बनाया है, जरा उस खुदा पर यकीन कीजिये।

कब तलक रो-रोकर यूँ, आसुओं की लकीरें खींचते रहोगे ?
चन्द लम्हों की है ये जिन्दगानी, जरा हँसके बसर कीजिये।

हर राह आसाँ नहीं होती, न ही कोई मुश्किल होती है,
यकीं न आए गर तुम्हें, तो खुद चलकर देख लिजिये।

कहीं कोई गुल कुचल न जाएं तुम्हारे कदमों तले,
जिस राह से भी चलो तुम, जरा सम्भल कर चला कीजिये।

फुल नहीं काँटे मिले, रास्ते सभी तन्हा मिले “तन्वीर“,
इस गम में ना जलकर, जो भी मिले, प्यार से उसे कबुल कीजिये।
 **************************** 

2. वो दौर और था
 


मतलब के है आज सारे रिश्ते यहां,
वफाओं की चलन का, वो दौर और था..

फेंकते हैं फूलों को मसल कर सभी यहां,
गुलदान में सजाने का वो दौर और था..

क्या कदर है अब मेरे खतों की सनम
किताबों में छुपाने का वो दौर और था..

हुस्न वाले नहीं अब वफा के लायक
उल्फत में मिटने का वो दौर और था..

मिटाती है आदमी को औरत ही आज
आदमी को बनाने का वो दौर और था..

सिकन्दर है अब मुकद्दर मेरे
मेरी शिकस्तों  का वो दौर और था..
******************

3 .दर्द की रवानी 

 मैंने आज अपने दर्द की  रवानी लिखी है..
बड़ी मुश्किल से दिल की कहानी लिखी है..

पानी को पानी की तासिर बताकर,
आज अपनी मौत पर जिंदगानी लिखी है..

चुराये है अक्सर मैंने आंसू तेरी आंखों से
 होठों पर तुम्हारे ही मैंने हंसी लिखी है..

फुलों में ठनी थी कल हंसते तुम्हे देखकर
  आज फूलों की मैंने वो बेईमानी लिखी है..

खुशनुमा वक्त था जब साथ तुम्हारा था
   तन्हाइयों में मैंने आलम की बेबसी लिखी है..
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4. हालात 
 हालात जो मेरे कल गमगीन हो गये
  रिश्तों की सारी तासीर बदल गई..

आके जो टकराया शीशमहल से पत्थर,
 महल-ए-जीस्त की तामीर बदल गई..

सारा कुसुर औ खताऐं मेरे सर आई
बंद लिफाफे से जो तस्वीर बदल गई..

आजमाया है हवाओं ने अपना जोर
सहरा में कल की प्राचीन बदल गई..

निकला था घर से राहें मंजिल पर ही
जाने कैसे ख्वाबों की ताबीर बदल गई..

बैठा रहा मैं अब तलक जिसकी राह में
वहीं मौत मेरी राह-आखिर बदल गई..
********************** 
5 हसरत

राह में खड़ी दीवारें गिर जाएं,
दिल से दिल फिर मिल जाएं..

डाली  है  मतभेदों  ने जो दरारे,
 प्यार के मरहम से वो मिट जाएं..

तमाम  उम्र  जिसकी ख्वाहिश रही,
 खुदा करें! एक नजर वो दिख जाए..

बद्दुआओं के सहारे कटी है जिन्दगी,
 आखिरी दौर में एक दुआ मिल जाए..

कि वो आएं, उनका दामन उलझे,
और  मेरी  हसरत पूरी हो जाए..
                                        
    ******************

6. मंजर  
सर पे कफन जुबां पे सच रखतें हैं..
इन्सा से नहीं खुदा से डर रखतें हैं..

बात पहुँचे सदा हर दिल तक हमारी,
आवाज में हम ऐसा असर रखते हैं..

खारों के इस बियाबान जंगल में हम
दिल में उल्फत का शजर रखतें हैं..

वक्त पे इन्कलाब लाने को शमशीरें नहीं,
हाथों में अपने हम कलम रखतें हैं..

जाने कब जरूरत आ पड़े वतन को,
जान कब हम हथेली पर रखतें हैं..

औरों को दर्द देना अपनी आदत नहीं,
पीर गैरों की जाने वो दर्दे-जिगर रखते हैं..

जाने कब कहां कोई जरूरत आ पड़े,
नजरों में हम हर-एक मंजर रखते हैं..

अंधेरे क्या खाक मिटायेंगें हमको,
दिल में रोशनीं-ए-सहर रखतें हैं..

बड़ा सताया है सियासतों ने गरीबों को,
आओ! बेघरों के सर हम घर रखतें है..

अंधेरें से जो न निकल पाये हैं कभी
घरों में उनके हम तन्वीर रखतें हैं..
******************


1 comment:

  1. दिल को छू लेने वाले भाव!!! अति सुंदर!!!

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